भिंड। नईदुनिया न्यूज मनुष्य को सदैव सहज और सरल स्वभाव से जीवनयापन कर अपने से पहले दूसरों के हित के लिए सोचना चाहिए। पवित्र आत्मा से परमात्मा का सुमिरन करने से ही पूजा सार्थक होती है। अगर हमारा मन सदैव दूसरों की बुराई में लीन रहे और ईश्वर की आराधना करे तो भी परमात्मा कभी खुश नहीं हो सकता। जो दूसरों के लिए अच्छा सोचता है परमात्मा ऐसे
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